They like to read my Life

Saturday, April 21, 2012

मेरी रूह




वो मेरी हर आदत को पहचानती हैं. मेरी आंखो के आंसुओ को अपनी उंगलियो से पोछकर खुशियो का काज़ल उन्ही उंगलियो से मेरी आंखो मे लगाती हैं. हैं.मेरी हसी को , मेरी यादो को , मेरी बातो को अपने लफ्ज़ो मे समेटती हैं.
मैं हमेशा उसे दिल से लगाकर रखता हू. हर दिन मै उससे कहता हू, तू नही होती तो मैं जिंदा रहकर भी मुर्दा रहता और वो हमेशा इस बात पर  मुस्कुरा देती हैं.

जीवन के हर सुख दुख की वो साथी हैं, लगता हैं मैं दिया और बाती हैं वो. कभी कभी कई दिनो तक उससे बात नही कर पाता हू. बस उसे देखकर मुस्कुरा देता हू. वो तब भी मुझसे नाराज़ नही होती हैं.
एक दिन अचानक वो कही गुम हो गई, मुझे लगा जैसे मेरी धडकन बंद हो गई, बहुत ढुढा उसे मैंने और फिर देखा अपने कमरे के एक कोने मे वो चुपचाप बैठी थी. मैंने पुछा तो कहती हैं, इस दुनिया मे बहुत परेशानिया हैं, मुश्किले हैं, लोग आपस मे लड रहे हैं, झगड रहे हैं. मैंने उसके हाथो को अपने हाथो मे लिया और कहा चल कुछ लफ्ज़ मोहब्बत के हम कहे मैं सोचू और तु लिखे मेरी प्यारी कलम.
मैंने उसके लिये कुछ लिखा हैं.... 







 मेरी कलम मेरी हर आदत को जानती हैं,
वो मेरी हर हरकत को पहचानती हैं,
अलफाज़ जब चाहते हैं रुकना,
ये मुई उन्हे ज़बान से खींच लाती हैं