They like to read my Life

Saturday, July 30, 2011

महक जुल्फों की ऐसी  थी उनके ,
लड़खड़ागए कदम हमारे ,
कायनात ने मुझसे कहा अच्छी थी ना वो तन्हाई 

खुशबू आंधी की तरह आई 
नशे में चूर हो कर गिर गए हम 
कायनात ने मुझसे कहा  अच्छी थी ना वो दवाई (शराब )

गिराने का कोई गम नहीं 
गिरते तो रोज़ हैं 
फर्क सिर्फ इतना सा  हैं 
रोज़ ज़मीन पर गिरते थे 
आज  खुबसूरत दल दल में गिरे हैं 
कायनात ने मुझसे फिर कहा 
अच्छी थी ना वो जुदाई 

(चिराग )


Wednesday, July 20, 2011

इश्क होता हैं दोस्ती के बाद

इश्क होता हैं दोस्ती के बाद ,
नशा चढ़ता हैं  शाम के बाद

शोला यूँ तो धडकता नहीं दिल में ,
लगती हैं आग मन में
जब देखता हूँ तुझे किसी और के साथ ,

इश्क होता हैं दोस्ती के बाद.......

कहना चाहूँ तुझसे जब दिल की बात 
बता दूँ तुझे तू क्या हैं मेरे लिए मेरी जान ,

सच को छुपाना आसान तो नहीं ,
पर झूठ मुह से निकलता हैं ,
तुझे देखने के बाद 

इश्क होता हैं दोस्ती के बाद....... 

शोर जब सुनता हूँ  गली में ,
सोचता हूँ खुद को बंद कर लूँ घर में ,
पर सन्नाटा सुनाई देता हैं तेरे आने के बाद

इश्क होता हैं दोस्ती के बाद....... 

(चिराग )