They like to read my Life

Sunday, August 7, 2016

भाई मैं हू चिंता मत कर



जिंदगी मे हम अकेले आते है और दुनिया की नज़र मे तो अकेले ही जाते है. परंतु जब हम इस दुनिया को अलविदा कहते है तो कई रिश्ते साथ होते है. जिनके बारे मे हमे याद नही रहता पर उन लोगो को जरुर हम याद रहते है जो हमारे साथ कई रिश्तो मे सहभागी बने. इन्ही रिश्तो मे से एक है दोस्ती का रिश्ता.


दोस्त, यार , यारा, मित्र , सखा ,सहेली और भिडू ऐसे कई नामो से जाना जाता है इस रिश्ते का साथी. बचपन मे जब चाकलेट को तोडकर दोस्त को आधी देते थे लगता था जिंदगी का सबसे बडा सुकून मिला है. पेंसिल की नोक टूट जाने पर इधर-उधर नज़र घुमाते ही हमारे कंधे पर एक हाथ आ जाता था और जिस शार्पनर को हम खोज़ रहे होते थे, वो उस हाथ मे होता था. दोस्त संग रहते थे तो मुर्गा बनने मे भी मज़ा आता था. जब दोस्त का जन्मदिन होता था . हम ऐसे खुश होते थे जैसे आज हमारा जन्मदिन हो उसके संग हर क्लास मे जाकर टाफी बाटते थे. जब कभी स्कूल मे खेलने का पिरियड होता था और दोस्त दुसरी टीम मे हुआ तब हमे धर्मसंकट शब्द का मतलब समझ आया था. दोस्त जहा कोचिंग जाता हम भी वही चले जाते या फिर वो हमारे पीछे आ जाता था.


कालेज़ मे जब आये तो फर्स्ट इयर के डर का साथी बना. दोस्त ना होता तो शायद कई असाइंटमेंट अधूरे रह जाते,अटेंडेंस शार्ट हो जाती आखिर प्रोक्सी भी वही लगाता था. इश्क की किताब का पहला पन्ना भी दोस्तो के नाम ही रहा. जब वो कहते थे- “ भाई मै सुबह से देख रहा हू ,तुझे  ही देख रही है “. साथ ही इश्क का आखरी पन्ना भी दोस्तो के नाम ही है –“ अरे तू चिंता मत कर वो तेरे लायक नही थी. “ दोस्त एक ऐसे सहारे की तरह होते है जो आपको टांग अडा के गिरा भी देगा और आपका हाथ भी नही छोडेगा. 

दोस्ती का रिश्ता हम खुद बनाते है और शायद इसलिये भरोसा भी ज्यादा करते है. एक्जाम की तैय्यारी हो या फिर वाई-वा हर डर के आगे ढाल बन जाते थे दोस्त. अगर ये कहू के हमारे हौसले की चाबी थे तो गलत नही होगा –“ अबे ये आसान है रुक मैं समझाता हू “. गलती किसी की भी हो पर इल्जाम सब अपने सर लेते थे. 



आज जब चाकलेट खाता हू तो दोस्त बहुत याद आते है. दोस्त तब भी याद आते है जब टिफिन मे रोटी चार होती है और खाना अकेले होता है. भूख तो मिट जाती है पर दिल मे एक कसक रह जाती है. चाट के ठेले पर जब आज भी दोस्तो की टोली की लाइन सुनता हू – “ ये ले मेरे 2 रुपये , अबे तु भी दे , अरे मैं कल दे दूंगा , तूने आजतक दिये है “ तो दोस्त बहुत याद आते है . जब उदास हो जाते है तो आफिस मे कोई कहता है “ कोई ना सब ठीक हो जायेंगा “ तो दोस्त की वो झप्पी याद आती है जो कुछ कहे बगैर ही सब ठीक कर देती थी. 


जब कभी गुमटी पर चाय की चुस्की लगाता हू तो दोस्त बहुत याद आते है. जब पेन मे रिफिल खत्म हो जाती है तो दोस्त बहुत याद आते है. एक लाइन – “ भाई मैं हू चिंता मत कर “ दोस्त की कही ये एक लाइन हमे हर तरह की मुश्किल पार करने का साहस देती थी .  


याद जब बीते वक्त को करता हू तो लगता है यादो मे दोस्त है या सिर्फ दोस्ती की यादे है. मेरे जिंदगी मे आये मेरे सभी दोस्तो को दोस्ती दिवस की बहुत बहुत बधाई..

Thursday, July 21, 2016

आखरी गलती


राजीव ने अपने पेन को ऊठाकर अंगूठे और उसके पास वाली उंगली से घुमाने लगा . इस तरह पेन को घुमाने की  कला हर कॉलेज़ जाने वाला स्टूडेंट को कक्षा 12वी से ही आ जाती है. इस कला मे जैसे ही कोई छात्र माहिर हो जाता है उसे लगने लगता है उसने जिंदगी की एक बहुत बडी पहेली हल कर ली है.

अचानक से शोर हुआ और राजीव के हाथ से पेन छूट गया और उसका ध्यान खिडकी पर गया. गली मे एक नारा हर कोई दोहरा रहा था . जीतेगा भाई जीतेगा गोलू भैय्या जीतेगा. इस शोर मे गली के नुक्क्ड के चाय वाले की आवाज़ सबसे तेज़ आ रही थी जिसकी गुमटी पर बैठकर गोलू शर्मा रोज़ छात्र-संघ के चुनाव जीतने की प्लानिंग करता था. उसने वादा किया था चाय वाले कैलाश से – “जैसे ही हम चुनाव जीतेंगे हम सबसे कहेंगे के आपके यहा की चाय की चुस्की लगा-लगा कर ही हम इस चुनाव को जीतने की प्लानिंग किये है और कैलाश इस आश्वासन के भरोसे गोलू के सभी साथियो को  मुफ्त मे चाय पिलाया करता था . 

राजीव शोर सुनकर अपने अतीत को याद करने लगा. उसने भी एक बार इसी चुनाव के लिये इसी गुमटी पर बैठकर प्लानिंग की थी. परंतु राजीव ने या उसके साथियो ने कभी भी कैलाश के यहा मुफ्त मे चाय नही पी थी . अचानक से उसके कमरे का दरवाज़ा खुला. “बेटा राजीव ले दुध पी ले “- उसकी मॉ ने यह कहते हुये दुध टेबल पर रखा और चली गई . राजीव ने कुर्सी सरकाई तो एक आवाज़ आयी ,कुर्सी के एक टांग के नीचे पेन दब गई थी . उसने पेन को उठाया और कुछ सोचने लगा. पेन को बडे आराम से संभाल कर घुमा रहा था  और जैसे ही उसने ध्यान हटाया पेन नीचे गिर गई . ये पेन राजीव को कविता ने दिया था. 

कविता जी हा जैसा हर कहानी मे होता है ,कविता राजीव की गर्लफ्रेड थी .दोनो एक दुसरे से बहुत प्यार करते थे . राजीव अपने कॉलेज़ का हीरो था और पूरे कॉलेज़ मे हर जगह ही उसके चर्चे थे . राजीव छात्रसंघ का चुनाव जीत के कॉलेज़ का प्रेसिडेंट बनना चाहता था . कविता और राजीव की मुलाकत कॉलेज़ के पहले साल मे हुई थी . कविता से राजीव ने पहली ही मुलाकात मे अपने प्यार का इज़हार कर दिया था . राजीव को कॉलेज़ के पहले ही हफ्ते मे एक सीनियर ने कहा – “ ओ चिरकुट कहा जा रहा है “. राजीव ने कहा –“ सर क्लास मे जा रहा था “. सीनियर ने कहा  -“ फर्स्ट ईयर मे हो “. राजीव ने हा मे सर हिलाया . तभी उधर से कविता का आना हुआ . सीनियर ने कहा –“ जा जाकर उस लडकी को ये फूल देकर आई.लब.यू कह के आ “ सभी सीनियर जोर से हसने लगे. राजीव को डर तो लगा था परंतु वो कविता को कॉलेज़ के पहले दिन से ही चाहने लगा था . 




जब राजीव ने कविता को फूल देकर अपने दिल की बात कही .कविता कुछ देर तो घबरा गई फिर उसने देखा दूर बैठे सीनियर हस रहे है तो वो ये समझ गई के ये रेगिंग का एक हिस्सा है. इसीलिये उसे इस बात का गुस्सा नही आया . लेकिन कहते है ना इश्क रंग धीरे –धीरे चढता है . कॉलेज़ के पहले साल के खत्म होते –होते  जब फ्रेशर पार्टी मे उसे कविता के लिये गाना गाने को कहा और उसने उस गाने के ज़रीये अपनी मोहब्बत का इज़हार कर दिया , कविता कुछ देर तक इसे फिर रेगिंग समझती रही .प्यार तो वो भी करती थी राजीव से परंतु चाह रही थी के इज़हार राजीव करे परंतु राजीव ने ये रेंगिंग के कारण किया था. राजीव ने आखिरकार  उसी पार्टी मे कविता को सच कह दिया और कविता ने भी उसके प्यार को स्वीकार किया . पहले साल के बाद राजीव हर किसी का चहेता था और सब चाहते थे वो कॉलेज़ का प्रेसिडेंट बने .


 राजीव ने चुनाव लडा और जैसी  सबको उम्मीद  थी वो जीत गया . शाम को उसकी जीत मे उसने एक पार्टी रखी . उसकी पार्टी मे उसके सारे दोस्तो के संग कविता भी आयी थी . पार्टी मे खाने के साथ शराब भी थी . राजीव वैसे तो नही पीता परंतु उस दिन सबके कहने पर थोडी पी ली, पर शराब कभी थोडी नही होती , जब तक पीकर होश ना खो बैठे तब तक उतरती भी नही है . रात मे जब शराब ज्यादा हो गई तो कविता ने सोचा वो राजीव को छोड आये . जब वो राजीव के घर पहुचे , राजीव ने कविता को अपनी बाहो मे भर लिया . कविता को लगा प्यार से वो ऐसा कर रहा था .परंतु वो होश मे नही था और वो कुछ आगे बढ गया . कविता ने उसे रोकने की कोशिश भी की परंतु राजीव अपने  होश मे नही था . कविता ने जोर से राजीव को धक्का  भी दिया पर कुछ ना हो सका.जब सुबह राजीव को होश आया तब उसे समझ आया उसने जो कविता के संग गलत किया . 



कविता ने राजीव से कहा – “ जो हुआ वो गलत हुआ. मैं तुम्हे कभी माफ नही करूगी” .  राजीव ने उसे बहुत समझाया के वो होश मे नही था . परंतु ये कविता के उसूलो के खिलाफ था . कविता ने कहा –“ राजीव मैं तुमसे बहुत प्यार करती हू. परंतु तुम सोचो के जो कल हुआ उसके बाद मैं तुम्हारे साथ जिंदगी कैसे बीता पाऊंगी “.कविता उससे प्यार करती थी इसीलिये उसने किसी को इस बारे मे नही बताया .
राजीव उसकी इस बात का कोई ज़वाब नही दे पाया.  

राजीव को इस बात का बहुत धक्का लगा और उसने अगले ही दिन कॉलेज़ के प्रेसिडेंट के पद से इस्तीफा दे दिया ये कहकर के उसे आई.ए.एस की तैय्यारी करनी है . सबने बहुत समझाया पर राजीव नही माना. राजीव उसके बाद कभी कविता से मुलाकात भी नही की . एक और शोर ने राजीव को वापस वर्तमान मे धकेल दिया. राजीव के हाथ मे वो पेन था जो उसे कविता ने दिया था जब उसने चुनाव जीता था . उस पेन को देखकर राजीव की आखो मे आसू आ गये. पेन की हालत देख के उसे लगा के उस दिन कविता की हालत भी ऐसी हुई होगी.


 राजीव ने अखबार उठाया और मुस्कुरा दिया .उसमे लिखा था आर.के कॉलेज़ की कविता को युवा मोर्चा की तरफ से प्रेसिडेंट के पद का टिकीट दिया गया है .उसे अपनी इस पहली और आखरी गलती पर अब अफसोस नही हो रहा था .


-                                                                                                                                                  
     चिराग जोशी 


 Picture is taken from Google.
    

Monday, April 18, 2016

बूंद




खुशी हो या हो गम के दिन,
साथ हमेशा रहती है.... बूंद
,
 
ढलती शाम कहु इसे या सुबह की लाली
,
साथ हमेशा रहती है ... बूंद 


हर पल को देखकर ,
अपने अस्तित्व को बताने ...बाहर आ जाती है ...बूंद 
.

खालीपन,उदासी, मुस्कुराहट या फिर खुशी ,
हर बार साथ निभाती है ....बूंद . 


सोचो अगर ये बूंद ना होती तो क्या होता,
 आँखों मे अहसास ना होता
,
बातो मे विश्वास ना होता
,
जैसे नदी की पहचान उसकी लहरे है
,
वैसे हमारी आत्मा है ...बूंद 

C.J 

Sunday, March 13, 2016

C.J Special



कदम कदम पर गिरा हू मैं,

पकड कर डोर होसलौ की चला हू मैं
 
इश्क़ भी किया मैंने तो छुप छुप के
 
क्योंकि...बेवफाई के शहर मे पला हू मैं

C.J

Monday, February 1, 2016

Kuch Panno par mein Likh Chuka hun


कुछ पन्नो पर मैं लिख चुका हु,
कुछ अभी बाकी है,

कुछ पर सबने अपनी यादो की कलम चलाई है,
तो कुछ पर कीसी ने रिश्तो की वरक लगाई है,

कुछ पन्नो पर मैं लिख चुका हु,
कुछ अभी बाकी है,

पुराने  गुलाब की खुशबू  से महक रहा हैं कोई ,
तो किसी पर बस स्याही ही नज़र आ रही है,

कुछ पन्नो पर मैं लिख चुका हु,
कुछ अभी बाकी है,


 C.J SPECIAL

Thursday, December 24, 2015

सयानी



कल की  ही तो बात है , जब गुड़िया अपने घर में सबकी लाड़ली बहु बन कर अपने ससुराल में आई थी। अभी शादी को वक्त ही कितना हुआ है ,सिर्फ  २ महीने और देखो ये वही गुड़िया हैं जो घर के सारे काम सिख गई है। सही कह रही हो काकी , अपने घर में तो ये एक गिलास पानी भी खुद नहीं पीती  थी वो भी लाकर देना पड़ता था। बेटा ससुराल में आकर सब करना पड़ता है। 
हां और अब ये वो पेन ,पेन्सिल और रंग लेकर  हर किसी फोटो भी नही बनाने लगती  है। सयानी हो गई हैं हमारी गुड़िया। 

 गुड़िया से शायद किसी ने नहीं पूछा के इस सयानेपन  के लिए उसने अपने उस सपने को कही छुपा दिया है जो उसे सबसे प्यारा था। जिसके लिए उसे सब घर में कहा करते थे के एक दिन गुड़िया बहुत बड़ी चित्र्कार  बनेगी। 

C.J

जिंदगी


मुस्कुराती हुई जिंदगी 
ख्वाहिशो से भरी हुई हैं ,
मन में उमंगो को लिए ,
आंधियो से भी लड़ पड़ी है। 


C.J Special