They like to read my Life

Tuesday, May 19, 2015

अल्फाज़ मेरे....

तेरी खामोशी भी एक अदा सी है,
तु कुछ कहे तो दुआ सी है
,
तेरे हाथो पर तेढी-मेढी ये लकीरे जो है,
मेरे नाम सी है.

Thursday, March 5, 2015

उत्साह लौट आया- Happy Hour Contest



जिंदगी मे हर इंसान अपने आप को आगे बढते हुये देखना चाहता है । उत्साह और जोश इंसान को हमेशा आगे बढने मे मदद करते है और जब कभी हम हार जाते है तो यही उत्साह को बढाने वाले एक पल का इंतेजार करते है ।
ऐसा ही एक पल मेरी जिंदगी मे भी आया था । मैंने लिखना 2008 मे शुरु किया था । उसके बाद 2 साल तक मैं सिर्फ शौकिया तौर पर लिख रहा था । परंतु मुझे सही रास्ते की तलाश थी । कविताये,कहानिया, राजनीति, खेल, फिल्म और कई विषयो पर मैं लिख रहा था । मुझे लगा के ऐसे तो मैं कभी कही नही पहुच पाऊंगा क्योंकी मैं अपने शौक को एक आयाम देना चाहता था ।
2010 मे मेरी मुलाकात आलोक दीक्षित से हुई । उनके आनलाईन ब्लाग पर मैंने लिखना शुरु किया और वहा सबसे पहले मैंने एक कविता लिखि । एक दिन वहा पर मैंने देखा के क्रिकेट के बारे मे बहुत कम लिखा जा रहा है और मैं अक्सर अपने ब्लाग पर क्रिकेट के बारे मे लिखता रहा हू । साथ ही मुझे क्रिकेट खेलने और देखने का शौक भी है । मैंने आलोक से कहा “ मैं आपके क्रिकेट सेक्शन मे लिखना चाहता हू “। उन्होने कहा “ आप एक लेख भेजिये, उसके बाद ही हम कुछ बता पायेंगे ” ।
आलोक से मेरी मुलाकात जुलाई मे हुई थी । मैंने 15 अगस्त को ध्यान मे रखकर एक लेख लिखा जिसमे आज़ादी के बाद से तब तक भारतीय क्रिकेट मे जो भी बदलाव आये उसकी जानकारी थी । मेरा ये लेख उन्हे पसंद आया । इसके बाद 2-3 लेख लिखे और भेजे जिन्हे सराहा गया । परंतु अब भी मैं उस रास्ते के इंतेजार मे था ।
एक दिन मैं स्टेशन से घर आ रहा था । अलोक भाई का काल आया और उन्होने कहा “ चिराग भाई हमने आपको अपना स्पोर्ट्स एडिटर बनाने का सोचा है “ । ये सुनकर कुछ देर तो मुझे समझ नही आया के क्या कहू । फिर मैंने कहा “ धन्यवाद आलोक भाई ” । उन्होने कहा “ आपको अब एक इंटरविव लेना है । मैंने कहा “ मैं तो सिर्फ लिखता हू थोडा बहुत पर इंटरविव आज तक नही लिया ” । उन्होने कहा  “ चिंता मत करीये मुझे भरोसा है के आप जरुर अच्छा इंटरविव करोगे ” ।
मैंने कहा “ मुझे किसका इंटरविव लेना है ” । उन्होने कहा “ भुवनेश्वर कुमार (अ‍ब भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्य ) उ.प्र के रणजी खिलाडी है ”  । मैंने सारी तैय्यारी की और आलोक भाई से नबंर लेकर पहले मैसेज़ से समय लिया और फिर काल किया । मुझे आज भी याद है वो 2 दिसबंर 2012 जब मैंने शाम को इंटरविव किया ।
भुवनेश्वर कुमार से वो बातचीत आज भी मेरे पास है । जब आलोक भाई ने  इंटरविव पढा तो उनके साथ पूरी दखलंदाजी की टीम भी खुश हुई  । मुझे जो राह उस दिन मिली उसे मैंने फिर आजतक पकड रखा है ।
उसके बाद मेरे 2 लेख बैंगलुरूड मैंगजीन मे भी प्रकाशित हुये । मैंने उसके बाद रफ्तार लाईव के लिये म.प्र के रणजी टीम के कप्तान देवेंद्र बुंदेला और आनंद राज़न का भी इंटरविव लिया । मैं अब खुद का क्रिकेट का ब्लाग भी चलाता हू । आलोक भाई ने जो स्पोर्टस एडिटर बना कर मुझे जो हौसला दिया वो अब तक मेरे काम आ रहा है । अगर आलोक भाई से मुलाकात नही होती तो अब तक मैं ब्लाग बंद कर चुका होता । जल्द ही मैं अपनी खुद की क्रिकेट की मैंगजीन लेकर आ रहा हू ।


This post is written for an happy Hour Contest at Indiblogger.


Sunday, March 1, 2015

लिखना आपसे सिखा है – happy hour contest


शब्दो का जादू किसे कहते है, ये बात मुझे बचपन मे ही समझ आ गई थी । बचपन मे गर्मी की छुट्टीयो मे मैं हमेशा अपने नानाजी के घर जाता था । मेरे नानाजी “ श्री रामप्रताप जी व्यास “ शामगढ मे रहते है । शामगढ मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले का एक छोटा सा गाव है । नानजी भुगोल विषय के शिक्षक थे । नानाजी को पढाने के साथ ही लिखने का भी शौक है । हिंदी, गुजराती और मराठी मे उन्होने अब तक कई लेख लिखे है ।
जब हम बचपन मे शामगढ जाते थे । नानाजी हमेशा चंपक, नंदन, बालहंस, और कई कहानी की किताबे हमे दिया करते थे । सभी भाई- बहनो मे मुझे पढने का शौक काफी था या ऐसा कहू के नानाजी के द्वारा दी गई इन किताबो के जरीये ये शौक लगा । जब मे बढा हुआ और कालेज़ मे आया तब तक ये शौक मेरे साथ था और अब भी है ।
लेकिन लेखन का शौक लगने का किस्सा कुछ अलग है । सन 2008 मे मुझे ब्लाग के बारे मे पता चला और मैंने 15 सितम्बर 2008 को अपना पहला ब्लाग बनाया । ब्लाग पर मैं अक्सर साफ्ट्वेयर की लिंक दिया करता था ।
एक दिन नानाजी का उज्जैन आना हुआ और उन्होने मुझे अपनी एक कविता सुनाई और कहा के तुम भी कोशिश करो कविता लिखने की । मैंने उनकी बात को समझा और शुरु हो गया और लिख डाली एक कविता सिर्फ आधे घंटे मे । उसके बाद मैंने जब वो कविता नानाजी को बताई तो उन्होने कहा के कविता ऐसे नही लिखि जाती है । कविता जिस विषय पर लिखना चाहते हो उसे पहले अच्छे से समझो, दिल और दिमाग मे उसे बसाओ फिर कलम उठा के लिखना शुरु करो । साथ ही कुछ कविताओ की किताबे भी पढो ।
मैंने इंटरनेट शुरु किया और शुरु कर दी सर्च । कुछ कविताओ के ब्लाग पढे तो समझ आया के कैसे लिखना चाहिये । इसके बाद मैंने फिर एक कविता लिखी और जब दोस्तो को पढाई तो वो सब मुझ पर हसने लगे । उन्होने कहा के ये कैसी कविता है जो समझ ही नही आई । मैं उदास हो गया और फिर जब नानाजी घर आये कुछ दिनो बाद तो उन्हे ये कविता पढाई । उन्होने कविता पढकर कहा के कविता तो अच्छी है । परंतु शब्द बहुत कठिन है । कविता मे हमेशा सरल शब्दो का उपयोग करो ताकी उसे हर कोई समझ सके । 
अगले दिन मुझे कालेज़ मे पता चला के कालेज़ की मैगजीन मे इस बार कहानी और कविताओ का प्रकाशन भी होगा । मैंने ठान लिया के मैं अपनी कविता इस मैंगजीन मे छपवा कर ही रहुंगा । नानाजी को जब बात बताई तो उन्होने कहा विषय तुम्हे चुनना है और फिर मैं तुम्हारी मदद करुंगा ।

मैं जब इस मैगजीन के लिये तैय्यारी कर रहा था । घर पर किसी को मेरा ये शौक पसंद नही था । सबका कहना था, पढाई पर ध्यान दो । पर मेरे नानाजी को मुझ पर भरोसा था । उन्होने कहा के ये काम तुम दिल से करना चाहते तो जरुर करो । मैं हर रोज़ 3-4 लाईन लिखकर उन्हे सुनाता और वो मुझे बताते के मैंने क्या गलतिया की है और उन्हे मैं कैसे सुधार सकता हू । एक हफ्ते बाद मैंने कविता लिख दी और जब नानाजी को सुनाई तो उन्होने कहा ये कविता जरुर छ्पेगी । परंतु घर पर किसी को उम्मीद नही थी और अब भी यही कहना था के इससे घर नही चलता ।
आखिरकार मेरी वो कविता छ्पी और पूरे कालेज़ मे उसे पसंद किया गया । घर पर अब सब मानते है के लिखने से भी जिविका चल सकती है । मैं अब ब्लाग पर लिखता और इनाम भी जीत चुका हू । हाल ही मैं इंडीब्लागर पर भी इनाम जीते है । सब अब खुश है  और खुशी से मेरी कविताये पढते है । 
आज मेरे सभी भाई बहन  बनाये हुये रास्ते पर चलने की कोशिश कर रहे है । सभी अपने दिल की आवाज सुन रहे है । 
इस सबके पीछे मेरे नानाजी है ।

This Post is Writtern for HDFC LIFE 



Tuesday, February 17, 2015

अगर कोई डोर ना हो-Happy Hour Contest

जिंदगी हर दिन आपको कुछ ना कुछ सिखाती है । इंसान पूरी जिंदगी बस सिखता ही रहता है और साथ मे सपने भी पूरे  करता है । अब ये सपने उसके खुद के होते है या फिर परिवार की जिम्मेदारी, कुछ हालात और मजबूरी के होते है । बचपन मे हम सब बडे-बडे सपने देखते थे । क्योंकी हमे कोई भी चीज़ पिछे नही खिंचती थी । लेकिन जैसे-जैसे हम बडे हुये, अपने हालत और परिवार के कारण उन सपनो को या तो भूल जाते है या फिर सपने बदल लेते है.
हर किसी की तरह मेरे भी कुछ सपने थे । जिन्हे मैं बचपन से पाना चाहता था, परंतु कुछ कारणो से पा ना सका । लेकिन अगर कोई डोर ना रहे जो मुझे पिछे खिंचे तो जरुर मैं उन सपनो को पाना चाहूंगा ।
1.    भारतीय क्रिकेट टीम के लिये खेलना :- बचपन मे जब मैं छोटा था तो मेरे पिताजी अक्सर मुझे टी.वी के सामने बैठा देते थे और वो कहते है के मैं बडे चाव से क्रिकेट देखा करता था । थोडा बडा हुआ तो क्रिकेट खेलना शुरु किया और फिर स्कूल,कालेज़ की टीमो मे भी खेला । मैंने क्रिकेट की कोई कोचिंग नही ली, परंतु मैं अपनी टीम का अहम हिस्सा था । आज भी जब क्रिकेट खेलने को मिलता है, मैं जरुर खेलता हू । लेकिन पढ्ने मे  भी बढिया था । घर पर कभी मेरे क्रिकेट खेलने के शौक को समझा नही और अब शादी हो गई है । परिवार की जिम्मेदारी भी है । इसिलिये मुझे लगता है के अगर कोई डोर ना हो तो मैं आज भी क्रिकेट खेलना चाहता हू ।

2.       गायक बनना चाहता हू :- दिन तो याद नही,पर हा गाना जरुर याद है “ तेरे जैसा यार कहा, कहा ऐसा याराना..” याराना फिल्म के इस गाने को सुनकर पहली बार संगीत मे रुचि हुई । जब पता चला के ये गाना किशोर कुमार ने गाया है तो उनके कुछ ओर गाने सुने । बस फिर धीरे-धीरे गुनगुनाने लगा और एक बार स्कूल मे 15 अगस्त पर देशभक्ति का एक गीत भी गाया । सबने काफी सराहा मुझे उस दिन स्कूल मे और लगा के शायद मैं भी गा सकता हू । इंडियन आईडल का पहला सीज़न देखा तो फिर से गाने लगा और अक्सर किशोर कुमार के गाने ही गाता था । उसके बाद फिर कभी इस शौक को गम्भीरता से नही लिया । अब अगर समय मिले पारिवारिक जिम्मेदारियो से तो जरुर गायन सिखना चाहता हू ।




 3.    साफ्ट्वेयर कम्पनी :- इंजीनियरिंग मे दाखिले लेने के साथ ही ये सपना मेरे दिमाग मे घर कर चुका था । बचपन से तो नही था पर इंजीनियरिंग मे धीरे-धीरे ये परवान चढा और कोशिश भी की, कई बार दोस्तो से भी कहा क्योंकी कम से कम एक साथी तो चाहिये था । पर इस सपने को मैं जरुर पूरा करुंगा क्योंकी  शुरु मे पैसा नही मिलेगा इतना,इसीलिये कुछ थोडा कमा ले फिर शुरु करेंगे और अगर कल ही मिल जाये पैसा तो कल ही शुरु कर दुंगा
4. राजनीति  :- अन्ना हज़ारे के भ्रष्टाचार मुक्त भारत आंदोलन से “ आप “ पार्टी बन गई और कई युवाओ ने राजनीति मे आने का विचार किया । मेरा बचपन धार मे बीता और मैंने वहा के नगर निगम के चुनावो को काफी करीब से देखा है । साथ ही मैं एक एन.जी.ओ भी चलाता तो देश सेवा करने का जज्बा भी है । राजनीति मे आने से हर युवा घबराता है और हो भी क्यो ना, राजनीति की सच्चाई जो दिखती है वो है नही । परंतु मैं फिर भी राजनीति मे आकर देश की समस्याओ को हल करना चाहता हू ।

 5.  दुनिया घुमना :- ये सपना मेरा हर दिन बडा होता जा रहा है,क्योंकी दुनिया बहुत बडी है । मैं बचपन से घुमने का शौकीन हू । भारत मे भी कई जगह घुमा हू । नयी-नयी जगह जाकर वहा के बारे मे जानना अच्छा लगता है । आजतक विदेश नही गया और जल्द ही जाना चाहता हू । पैसा इक्कठा करके बस दुनिया घुमू, वहा के बारे मे ब्लाग पर लिखू । जो जगह आजतक बाकी दुनिया से  छिपी हुई है । उसे दुनिया के सामने लाऊ ।



तो ये थे मेरे सपने जिन्हे मैं कल पूरा कर लू अगर कोई डोर ना हो ।

This post is written for Happy Hour Contest, Befikar Umar Bhar at Indiblogger.

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Saturday, January 24, 2015

Great Design ,Budget Friendly Laptop - Happy Hour Contest

Gadgets especially Laptop always fascinates me from the time they came into existence. The reason behind my love for laptop is their size and I always love laptops which are compact and thin. Due to compact size I can work anywhere and also work for a longer time. You can’t work for more than 3 hours continuously at desktop.
I have a laptop which is 15 inches in size, but I love to own a laptop of size 14 inch. When I saw today a happy hour contest on Indiblogger in which we have to write about our preference between All In One PC ET 20140 and ASUS E-book X205TA. I checked both the products from ASUS and decided to buy ASUS E-book X205TA which will suit my work especially my writing.

So let me tell you the features I like about ASUS E-book X205 TA: - 

Design and Compact Size: - I love the design of this laptop, it is slim and looking beautiful. Which will attract everyone who will see this laptop and also if your laptop has good looks. It motivates you to work on that laptop. Size is compact and weight is less than 1 KG because of which I can use it even when I was taking walks in my backyard and very easy to carry it to my office.

Adapter Size: - Most of the time if we buy a light weight laptop we have to carry a heavy weight charger. ASUS kept this thing in mind and launches a lightweight and compact adapter with this model, which will fit in your pocket. Thin (17.5 mm): - ASUS E-book X205 TA is very thin, you can even carry with your fingers and can be fitted in our small college or office bag. 

Battery Life: - Battery life of ASUS E-book X205 TA is quite long, it can last for 12 hours, it can be less than this, but it will help to work all day long and if at some time it shows “ battery low “ indicator you have a pocket size charger with you.

Microsoft Office 365: - This a very important and useful inclusion for those who works mostly in Microsoft office application. With this we don’t have to think of any crack or duplicate license key for Microsoft Office. 

Online 500 GB Space: - Those who think that 32GB inbuilt space is less, should consider that you will get 500 GB Space Web Storage that allow you to share files and documents online. This online space will be available for 2 years.


Intel Atom Processor: - It comes with 1.33 GHz Intel Atom quad processor, which speeds up the process of your software which you will use with this laptop.

2GB RAM: - It comes with 2GB RAM which will help your applications to run smoothly. Narrow Bezel: - this will help you a more enhanced vision and your videos, movie and picture will not look small in size with this feature. Low Noise: - it is developed with Fan less technology which helps you to work with full concentration and focus. Other laptops fan starting giving a noisy sound after some time. 


Micro SD Card up to 128 GB: - You can use a micro SD card up to 128 GB, so if you even want to store all of your data, you can store it with the help of bigger storage size SD Card.

 In an all a great laptop which will fit in your budget
You can see the detail of both the products of ASUS by clicking the link below.



This post is written for Happy Hour Contest at Indiblogger.


 

असर हो रहा -Happy Hour Contest

इश्क ,प्यार मोहब्बत तीन अलग – अलग नाम है पर सभी का रिश्ता दिल से है । कहते हैं यही वो चीज़ है जो खुदा ने हर इंसान को बराबर दी है । कोई इंसान इसके मायने समझता है तो कोई इसे नज़रअंदाज़ कर देता है ।
अपनी ज़िंदगी मे हर इंसान कभी ना कभी तो इश्क करता है और कहते है जब इश्क होता है, तो सब कुछ प्यारा लगने लगता है । इश्क हमे भी हुआ था और सच मे उस वक्त सब कुछ प्यारा लगने लगा था । टीचर की डांट से लेकर मोह्ल्ले के कुत्ते भी अच्छे लगने लगे थे ।
उस प्यार की शुरुवात कुछ यू हुई थी । हम साइंस कालेज़ मे पढते थे और हमारा वहा कोई खास रुतबा नही था । बस अपने ग्रुप के संग बैठकर पढाई करते थे । प्रथम वर्ष शुरु हुआ ही था और अचानक एक दिन उसका आना हुआ –हॉ आपने ठीक पहचाना आपने मेरी प्रेमिका निधी,उपनाम इसलिये नही बता रहा हू क्योंकि इश्क जाती,धर्म ,समाज़ सबसे परे होता है.अंदर आकर वो मुझसे दो बेंच पीछे जाकर बैठ गई और उस दिन मुझे पीछे की बेंच पर बैठने का मतलब फायदा समझ आया ।
मुझे तो उससे उसी दिन इश्क हो गया था। पर अगले 15 दिनो तक उससे बात नही हुई थी । आखिरकार एक दिन हमारे एक शिक्षक ने पूरी कक्षा को 4-4 के ग्रुप मे बाट कर एक प्रोजेक्ट पर काम करने को कहा , हमे एक दो दिन का वक्त मिला इस प्रोजेक्ट को पूरा करने मे और हमने उसे एक दिन मे ही पूरा करा लिया । इसी कारण हमारे ग्रुप को 1 दिन का अवकाश मिला ।हम चारो फिल्म देखने गये और फिर एक रेस्त्रा मे खाना खाने गये । उस दिन उससे काफी बाते हुई , उसने कहा – “ तुम बहुत अच्छे हो और समझदार भी, जो लडकी तुमसे प्यार करेगी वो किस्मत वाली होगी। उसकी इस बात पर मैंने कहा- “तुम्हे किस तरह के लडके पसंद है “ । उसने कहा – “ समझदार, स्मार्ट और जो अपने प्यार का इज़हार मुझसे एक अलग ढंग से करे ।
अगले दिन से हमारा ध्यान सिर्फ इस बात पर रहा के कैसे हम अलग ढंग से अपने प्यार का इज़हार निधी से करे । हमारे कालेज़ मे एक प्रतियोगिता का अयोज़न हुआ जिसमे एक कविता लिखनी थी । जो प्रतिभागी सबसे अच्छी कविता लिखेगा उसे उस कविता को एक टीवी के कार्यक्रम मे उस कविता का कवितापाठ करने का मौका मिलेगा. कविता लिखने का हमे शौक था और हमने ये ठान लिया के हम अपनी कविता के ज़रिये निधी तक अपने दिल की बात पहुचायेंगे । हमने उस प्रतियोगिता के लिये एक कविता लिखी और उस कविता के लिये हमे प्रथम पुरुस्कार मिला । हमने कार्यक्रम मे जाकर वो कवितापाठ किया । चलिये आपको भी सुनाते है वो कविता ।
ये कविता मैंने किसी खास के लिये लिखी है और इस कविता के जरिये मे उससे अपने प्यार का इज़हार करना चाहता हू । इतना कहकर हमने कविता सुनाना शुरु की ।
असर हो रहा हैं,
तेरी मौजूदगी का,

असर हो रहा हैं,
धीमी सी आंच पर पकते इश्क का,

असर हो रहा हैं,
तेरी हर आदत का,

असर हो रहा हैं,
उस मुलाकात की रात का,

असर हो रहा हैं,
वो रस मे डूबी तेरी उस बात का,

असर हो रहा हैं,
तेरे हाथो की वो तेढी-मेढी लकीरो का,
असर हो रहा हैं,
तेरी आंखो मे सिमटी मेरी उस तस्वीर का,
असर हो रहा हैं,
उन उंगलियो का जिन्होने थामा था हाथ मेरा

असर हो रहा हैं,
लबो को खोलती तेरी उस मुस्कान का,

असर हो रहा हैं…..
धन्यवाद ।

उसके बाद तालियो की गडग़डाघट को सुनकर लगा के हमने काफी अच्छी कविता लिखी थी । कविता खत्म करते ही कार्यक्रम के संचालक महोदय ने कहा “ ये तो बताइये के आखिर ये असर किसका है और किसके लिये लिखी आपने ये कविता “
हमे ये मालूम था के ये कार्यक्रम निधी देख रही होगी और इससे अलग तरीका नही हो सकता था निधी से अपने प्यार का इज़हार करने का । साथ ही आज वेलेंटाइन डे भी है।आज के दिन प्यार का इज़हार करने पर निधी बुरा भी नही मानेंगी ।
हमने दिल पर हाथ रखा और कहा के ये कविता मैंने निधी के लिये लिखी है । ये असर निधी का है , जबसे उसे मैंने पहली बार देखा तब से उससे इश्क हो गया था ।
ये उसका ही असर है के हम आज यहा इस मंच पर कविता पाठ कर पाये है ।
उस कार्यक्रम के बाद ही निधी हमसे मिली और अपने दिल की बात कही.तो ये था हमारा अंदाज़ अपने इश्क का इज़हार करने का । आपका तरीका क्या है अपने इश्क का इज़हार करने का ।
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 This post is written for Happy Hour Contest at Indiblogger